नीति आयोग की शासी परिषद
राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था या नीति आयोग का गठन 1 जनवरी, 2015 को मंत्रिमंडल के संकल्प के माध्यम से किया गया और यह भारत सरकार के थिंक टैंक के रूप में काम करता है। नीति आयोग की शासी परिषद में सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों के साथ अन्य संघ राज्यक्षेत्रों प्रदेशों के विधानमंडल और उप-राज्यपाल शामिल हैं। यह 16 फरवरी, 2015 को मंत्रिमंडल सचिवालय की अधिसूचना के माध्यम से प्रभावी हुआ।
अब तक परिषद की चार बैठकें माननीय प्रधाननमंत्री की अध्यक्षता में राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्रियों / उप-राज्यपालों और नीति आयोग के अन्य सदस्यों के साथ आयोजित की गई हैं।
- पांचवीं बैठक: 15 जून 2019

नीति आयोग की शासी परिषद् की पांचवीं बैठक 15 जून, 2019 को राष्ट्रपति भवन में प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें पदेन सदस्य के रुप में केंद्रीय मंत्रियों और विशेष आमंत्रितों के अलावा जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल, 26 मुख्यमंत्रियों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उप-राज्यपाल ने भाग लिया। बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्यगण, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने सहयोगपूर्ण संघवाद को प्रेरित करने के लिए नीति आयोग की शासी परिषद् के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसमें सामूहिक रूप से गरीबी, बेरोजगारी, सूखा, प्रदूषण,अल्प-विकसित क्षेत्रों और भारत की प्रगति में बाधा डालने वाले सभी कारकों का मुकाबला करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लक्ष्य इस महान देश की संभावनाओं का भरपूर उपयोग करने, 2022 तक न्यू इंडिया बनाने और 2024 तक पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक राज्य को अपनी निर्यात संभावनाओं का मूल्यांकन करके निर्यात और रोजगार बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों का निर्धारण कर देश की जीडीपी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
विभिन्न मुख्यमंत्रियों द्वारा की गई रचनात्मक चर्चा और सुझावों का स्वागत करते हुए, प्रधानमंत्री ने परिषद को आश्वासन दिया कि निर्णय लेने के दौरान इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। परिषद की पांचवीं बैठक की कार्यसूची में निम्नलिखित मदें थीं:
1. वर्षा-जल संचयन
2. सूखे की स्थिति और राहत के उपाय
3. आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम - उपलब्धियां और चुनौतियां
4. कृषि में सुधार: निम्नांकित पर विशेष जोर के साथ संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता:
1. कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम
2. आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए)
5. वामपंथी उग्रवादग्रस्त जिलों पर विशेष फोकस के साथ सुरक्षा संबंधी मुद्दे
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण की दिशा में राज्यों के प्रयासों की सराहना की और सभी राज्यों से नवीन जल प्रबंधन उपायों को कारगर बनाने और कार्यान्वित करने का आग्रह किया। एक विकासात्मक संसाधन के रूप में जल पर एकीकृत और समग्र दृष्टिकोण विकसित करने के लिए 'जल शक्ति’ मंत्रालय का सृजन केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने कृषि में संरचनात्मक सुधारों पर एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां भारत के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार सुगमता जैसे वैश्विक मानदंड पर भारत खुद को स्थापित कर रहा है। 2024 तक पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, प्रधान मंत्री ने राज्यों से अपनी अर्थव्यवस्था को 2 से 2.5 तक गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखने को कहा ताकि आम आदमी की क्रय शक्ति भी बढ़े। उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपने राज्य की निर्यात क्षमता का अध्ययन करने और संभावनाओं संवर्धन पर काम करने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करने और भारत के विकास के लिए मिलकर काम करने के प्रति उत्सुक है।
- चौथी बैठक: 17 जून 2018
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नीति आयोग की शासी परिषद की चौथी बैठक 17 जून 2018 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित की गई। दिन भर चली बैठक के दौरान परिषद ने निम्नांकित पर चर्चा की:
- किसानों की आय दोगुनी करने के लिए किए गए उपाय, जिनमें शामिल हैं:
- ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड
- ग्रामीण / कृषि हाट / ग्रामीण कृषि बाजार (ग्राम)
- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी स्कीम और जल संरक्षण में इसका योगदान
- सरकार की अग्रणी स्कीमों के तहत हुई प्रगतिः
- आयुष्मान भारत
- पोषण मिशन
- मिशन इन्द्रधनुष
- आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष रूप से चिह्नित जिलों की विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उठाए गए कदम
- 2019 में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के लिए प्राप्त सुझाव।
दिन भर के विचार-विमर्श के अंत में, प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद को प्रेरित करने के लिए एक मंच के रूप में नीति आयोग की शासी परिषद के महत्व पर प्रकाश डाला और भारत के लिए विकास परिणामों को आगे बढ़ाने तथा दोहरे अंक की वृद्धि हासिल करने के लिए प्रभावी केंद्र-राज्य सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्यों से अपनी अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास लक्ष्य तय करने का आह्वान किया क्योंकि विश्व को आशा है कि जल्द ही भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। उन्होंने राज्यों को सलाह दी कि वे अपने निर्यात के विस्तार और निर्यात उन्मुख निवेश को आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दें और साथ ही निवेश सम्मेलनों और कार्यक्रमों के आयोजन भी करें।
प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश, बिहार, सिक्किम, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से कृषि और मनरेगा ’विषय पर समन्वित नीति दृष्टिकोण वाली सिफारिशें करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों को कृषि जैसे खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और संभारतंत्र में कॉर्पोरेट निवेश बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि संघ सरकार 15 अगस्त, 2018 तक 45,000 अतिरिक्त गाँवों और उन 115 आकांक्षी जिलों में सात प्रमुख योजनाओं की 100% कवरेज प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्यों से जमीनी स्तर पर विकास करने के लिए 'आकांक्षी प्रखंडों' की पहचान करने का आग्रह किया।
- किसानों की आय दोगुनी करने के लिए किए गए उपाय, जिनमें शामिल हैं:
- तीसरी बैठक: 23 अप्रैल 2017
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शासी परिषद की तीसरी बैठक 23 अप्रैल 2017 को आरबीसीसी, राष्ट्रपति सचिवालय, नई दिल्ली में हुई।
उपाध्यक्ष, नीति आयोग ने 15 साल के दृष्टिपत्र पर प्रस्तुति दी जिसमें 7 साल की कार्यनीति और 3 वर्ष की कार्रवाई कार्यसूची शामिल थी। उन्होंने बैठक में परिचालित कार्रवाई कार्यसूची के मसौदे की रूपरेखा सामने रखी जिसे राज्यों के इनपुट से तैयार किया गया था।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कृत कार्रवाई रिपोर्ट और नीति आयोग की पहलों पर एक प्रस्तुति दी और राजस्व सचिव ने जीएसटी पर एक प्रस्तुति दी जिसमें व्यवस्था के लाभों और भावी राह के बारे में बताया गया।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की आय दोगुनी करने, सिंचाई, प्रौद्योगिकी निर्माण और प्रसार, नीति और बाजार सुधार, ई-एनएएम, पशुधन उत्पादकता आदि क्षेत्रों पर प्रस्तुति दी।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय असंतुलन; सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए राज्यों द्वारा जीईएममंच का उपयोग करने; अलग-अलग राज्यों की आवश्यकताओं के अनुसार राज्यों द्वारा जिला खनिज निधि और सीएएमपीए कोष जैसे कोषों की बेहतर योजना और स्थायी उपयोग के लिए एक खाका तैयार करने संबंधी विभिन्न मुद्दों को छुआ।
- दूसरी बैठक: 15 जुलाई 2016
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नीति आयोग की शासी परिषद की दूसरी बैठक 15 जुलाई 2015 को आयोजित की गई। प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार का यह दृष्टिकोण दोहराया कि राज्य इकाइयों को "टीम इंडिया" के हिस्से के रूप में सभी विकास प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
परिषद ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्वास अधिनियम में उचित मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकार पर परामर्श आयोजित किया।
बैठक में अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में, प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों को गरीबी समाप्त करने के लिए एक साथ चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण पर राजनीतिक गतिरोध ग्रामीण विकास को प्रभावित कर रहा था जिसमें स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने सभी से अपील की कि राजनीतिक विचार किसी ऐसे समाधान के बीच में नहीं आने चाहिए जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के विकास आसान हो और जो किसानों को अधिक समृद्ध बनाए।
- पहली बैठक: 8 फरवरी 2015
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नीति आयोग की शासी परिषद की पहली बैठक 8 फरवरी, 2015 को की गई जिसमें माननीय प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों से सहकारी संघवाद का एक मॉडल बनाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया ताकि केंद्र और राज्य एक साथ आकर टीम भारत बनें और मतभेदों को हल कर सकें तथा प्रगति और समृद्धि की एक साझा राह निर्धारित कर सकें।
इसलिए, सहकारी संघवाद की भावना में, शासी परिषद ने फैसला लिया कि नीति आयोग मुख्यमंत्रियों के तीन उप-समूहों का गठन करेगा:
इसके अलावा, यह भी तय किया गया था कि राज्य नीति आयोग के नेतृत्व में दो कार्यदल गठित करेंगे:
- कृषि विकास
- गरीबी उन्मूलन
सभी उप-समूहों की रिपोर्टें नीति आयोग ने प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत कर दी हैं। मुख्यमंत्रियों की उप-समूह की बैठक में कई विवादित मुद्दों पर आम सहमति बनाने में मदद मिली, न केवल उप-समूहों में प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यों के लिए, बल्कि क्षेत्रीय बैठकों, परामर्शों आदि के माध्यम से अन्य के लिए भी।





