नीति आयोग की शासी परिषद की 17 जून, 2018 को आयोजित चौथी बैठक में प्रधान मंत्री ने भी एक उपसमूह का गठन किया जिसमें सात राज्यों अर्थात मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, और सिक्किम के मुख्यमंत्री और सदस्य, नीति आयोग शामिल हैं जिससे कि किसानों के खेतों में विशेष रूप से बुवाई पूर्व और कटाई के बाद की गतिविधियों में कृषि क्षेत्र और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित किया जा सके। यह कृषि में उत्पादन की बढ़ती लागत के बारे में मुख्यमंत्रियों द्वारा की गई चर्चा और चिंतन के परिणामस्वरूप था।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री उप-समूह के संयोजक हैं। कृषि वर्टिकल, नीति आयोग इस उपसमूह का सेवा प्रदाता है।
उप-समूह की पहली बैठक 12 जुलाई, 2018 को आयोजित की गई। श्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बैठक में भाग लिया। बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विचार-विमर्श में शामिल हुए। श्री एन. चंद्रा बाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी ने उप-समूह के संयोजक को लिखित में अपने सुझाव भेजे।
बैठक के दौरान, पांच महत्वपूर्ण क्षेत्र जिसमें मनरेगा सकारात्मक रूप से काम कर सकता है, का सुझाव दिया गया। ये सुझाव निम्नलिखित हैं:
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खेती की लागत को कम करना;
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जल या अन्य इनपुट के कुशल उपयोग के माध्यम से उत्पादन को बढ़ाना;
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एकत्रीकरण और बाजार के बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहित करके किसानों को पारिश्रमिक मूल्य प्रदान करना;
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प्राकृतिक खतरों के बाद कृषि भूमि और संपत्ति का पुनर्वास;
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मनरेगा फंड का उपयोग करके पुन: रोपण और व्यावसायिक विविधीकरण और लाभ को अधिकतम करने में मदद करने के लिए कृषि में विविधीकरण लाना।
इसके अलावा, किसानों के खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेत की बाड़ लगाने को प्रोत्साहित करने का भी सुझाव दिया गया था। इन सभी मुद्दों पर पटना, भोपाल, हैदराबाद, गुवाहाटी और नई दिल्ली में आयोजित पाँच क्षेत्रीय कार्यशालाओं में विशेषज्ञों, किसानों और किसानों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकारों सहित अन्य हितधारकों के साथ चर्चा की गई।
मसौदा रिपोर्ट उपसमूह के संयोजक को प्रस्तुत की गई है।





