8 फरवरी 2015 को आयोजित नीति आयोग की पहली शासी परिषद की पहली बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसरण में, कौशल विकास संबंधी मुख्यमंत्रियों का उप-समूह 9 मार्च को गठित किया गया था (और 24 मार्च 2015 को आंशिक रूप से आशोधित) ताकि मानव संसाधनों और विशेष रूप से युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जा सके तथा कुशल श्रमशक्ति का एक पूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के वैज्ञानिक तरीकों पर काम किया जा सके।
उप-समूह को नीति आयोग के सलाहकार (श्रम और रोजगार) और सलाहकार (ग्रामीण विकास) का सहयोग प्राप्त होता है और यह निम्नलिखित के लिए नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की सहायता करेगा:
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राज्य स्तर पर क्षमता संवर्द्धन और कौशल मानकों में सुधार के लिए राज्य कौशल विकास मिशनों को मजबूत करने के उपाय सुझाना;
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कौशल विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी की पड़ताल करना और पाठ्यक्रम विकास, वितरण तंत्र, शिक्षाशास्त्र, प्रमाणन, प्रशिक्षक लगाव, प्रशिक्षुता प्रशिक्षण और वित्तपोषण में निजी क्षेत्र की बेहतर भागीदारी के लिए सुझाव देना;
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विशेष रूप से जनांकिकीय रूप से लाभप्रद राज्यों में कौशल कार्यक्रमों की पहुंच का विस्तार करने के उपायों का प्रस्ताव करना
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प्रशिक्षकों / अनुदेशकों / आकलनकर्ताओं की कमी से निपटने के उपायों की सिफारिश करना;
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इन प्रयासों में भाग लेने के लिए रेलवे और सशस्त्र बलों के साथ-साथ पंचायतों, नगर पालिकाओं और नागरिक समाज के संगठनों को इस्तेमाल करने के लिए सुझाव देना;
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करिअर मार्गदर्शन और प्रशिक्षणोपरान्त प्लेसमेंट पर नजर रखने के तरीकों का प्रस्ताव करना
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पायलटों की अप-स्केलिंग, सर्वोत्तम कार्यशैलियों को साझा करने, प्रसार और अन्य राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा उसकी प्रतिकृति को अपनाए जाने के लिए राज्यस्तरीय नवप्रवर्तनकारी उपायों के सुझाव देना
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कोई अन्य उपाय
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