नीति आयोग ने शासन के सभी स्तरों पर अत्याधुनिक क्षमता प्रसार के साथ अवसंरचना परियोजनाओं की परिवर्तनकारी, सतत प्रदायगी को हासिल करने के उद्देश्य से ‘‘अवसंरचना परियोजनाओं हेतु राज्यों के लिए विकास सहायता सेवाओं (डीएसएसएस)’’ के लिए एक संरचित पहल लागू की है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य पीपीपी की सफलता की गाथाएं सृजित करना और अवसंरचना परियोजना प्रदायगी मॉडलों को फिर शुरू करना है ताकि एक संधारणीय अवसंरचना सृजन चक्र स्थापित हो सके।
डीएसएसएस अवसंरचना पहल में राज्य सरकारों / संघ राज्य-क्षेत्रों को संकल्पना योजना से लेकर वित्तीय समापन तक परियोजना स्तर का समर्थन प्रदान करना शामिल है। नीति आयोग ने इस पहल को औपचारिक रूप देने और परियोजना की लघु सूची चिहि्नत करने और चयनित अवसंरचना परियोजनाओं का ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन करने के लिए संव्यवहार प्रबंधन प्रदान करने हेतु राज्यों के साथ जुड़ने के लिए मैसर्स अर्न्स्ट एंड यंग एलएलपी (ईवाईएलएलपी) को अपने परामर्शदाता के रूप में नियुक्त किया है।
इस पहल का चरण I वित्त वर्ष 2018 में पूरा किया गया था, जिसमें प्रस्तुतिकरणों की अनुक्रियाशीलता, तत्परता, भूमि की उपलब्धता, प्रभाव, प्रतिकृतिशीलता, जोखिम, व्यवहार्यता मूल्यांकन और राज्य की प्रतिबद्धता जैसे मानदंडों पर आधारित एक बहु-चरण परियोजना चयन ढांचे के आधार पर राज्यों से प्राप्त 400 से अधिक परियोजनाओं में से 10 परियोजनाओं वाले एक प्रमाण्य परियोजना शेल्फ का चयन किया गया था। लघु सूची में शामिल आठ राज्यों की 10 परियोजनाओं को राज्य सरकारों के साथ समझौता ज्ञापन आधारित साझेदारी के माध्यम से पीपीपी पद्धति के तहत विकास के लिए चुना गया:
वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान, इस पहल का चरण II पूरा हो गया था और चयनित परियोजनाएं कार्य-सम्पादन चरण पर आगे बढ़ गई हैं। द्वितीय चरण के भाग के रूप में, परियोजना की तैयारी संबंधी कार्यकलाप किए गए और कार्यान्वयन की योजना बनाई गई थी।
10 चयनित परियोजनाओं के लिए तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता-पूर्व रिपोर्टें और कार्यान्वयन योजनाएं तैयार की गई थीं। परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता-पूर्व रिपोर्टों में परियोजना की उच्च-स्तरीय अवधारणा योजना, कार्यान्वयन कार्ययोजना और पीपीपी संरचना विकल्प शामिल थे।
संबंधित राज्य सरकार के प्राधिकारियों से चर्चा और प्रस्तुतियों के आधार पर इन व्यवहार्यता-पूर्व रिपोर्टों पर विचार-विमर्श किया गया और उन्हें अंतिम रूप दिया गया। संबंधित राज्य सरकारों द्वारा 10 परियोजनाओं में से छह के लिए व्यवहार्यता-पूर्व रिपोर्टों पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी।
इन परियोजनाओं में निवेशकों का विश्वास जागृत करने के लिए, दस में से निम्नलिखित तीन परियोजनाओं के लिए निवेशक परामर्श-बैठकें आयोजित की गईं: भुवनेश्वर में बीटीसीडी क्षेत्र के लिए स्मार्ट मल्टी-यूटिलिटी, तमिलनाडु के चिहि्नत जिलों में फसल-कटाई के बाद एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन अवसंरचना और हरियाणा में चयनित कमान कवरेज क्षेत्र (सीसीए) कलस्टरों में एकीकृत समुदाय आधारित सूक्ष्म सिंचाई अवसंरचना।
डीएसएसएस अवसंरचना के तहत ईवाई एलएलपी (परामर्शदाता) को अतिरिक्त सात द्वीप परियोजनाओं के लिए चरण III के मुख्य लक्ष्यों हेतु अधिदेश दिया गया था। अतिरिक्त द्वीप परियोजनाओं के लिए, वर्ष के दौरान निवेशक परामर्श बैठक आयोजित की गई और मसौदा बोली दस्तावेज तैयार किए गए। परियोजनाओं के लिए वर्तमान में बोली प्रक्रिया शुरू करने के लिए सक्षम प्राधिकारियों से अनुमोदन की प्रतीक्षा है।
परियोजना के चरण III के एक भाग के रूप में, नीति आयोग ने ईवाई एलएलपी के साथ मिलकर दो परियोजनाओं नामतः पीपीपी पद्धति के तहत रुड़की क्लस्टर का एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और हरियाणा में चयनित कमान कवरेज क्षेत्र (सीसीए) समूहों में एकीकृत समुदाय आधारित सूक्ष्म सिंचाई अवसंरचना के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए तकनीकी परामर्शदाताओं की नियुक्ति हेतु बोलियों को तैयार करने और जारी करने में सहायता प्रदान की।





