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पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम

पूर्वोत्तर के लिए नीति मंच का गठन फरवरी 2018 में किया गया था, ताकि हमारे देश के पूर्वोत्तर-क्षेत्र में त्वरित, समावेशी लेकिन सतत आर्थिक विकास में विभिन्न बाधाओं की पहचान की जा सके और पहचान की गई बाधाओं को दूर करने के लिए उपयुक्त अंतःक्षेपों की सिफारिश की जा सके। यह नीति आयोग  द्वारा गठित पहला क्षेत्रीय मंच है।

 

इस मंच की सह-अध्यक्षता उपाध्यक्ष, नीति आयोग और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय  के राज्य मंत्री द्वारा की जाती है। पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) मंच के सचिवालय के रूप में काम करती है। इसमें सभी पूर्वोत्तर राज्यों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों / विभागों का प्रतिनिधित्व है। इसके सदस्यों में पूर्वोत्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी गुवाहाटी, आईआईएम शिलांग, एनईआरआईएसटी, आरआईएस, आरएफआरआई आदि के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हैं।

 

niti forum

पूर्वोत्तर मंच की कार्यसूची में रेल, सड़क और हवाई संपर्क में सुधार, क्षेत्र में जल संसाधन की क्षमता का दोहन, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का विकास और क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु कार्यनीतियाँ शामिल है।

 

मंच की पहली बैठक 10 अप्रैल 2018 को त्रिपुरा के अगरतला में हुई थी। केंद्रीय मंत्रालयों / विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे पहली बैठक के विभिन्न निर्णयों पर आवश्यक कार्रवाई करें और अनुवर्ती कार्रवाई की निरंतर निगरानी की जा रही है।

 

मंच की दूसरी बैठक दिसंबर 2018 में असम के गुवाहाटी में आयोजित होनी है। दूसरी बैठक के लिए पहचाने गए मुख्य क्षेत्र पर्यटन, स्टार्टअप, बागवानी, बांस, खाद्य प्रसंस्करण, सम्पर्कता और जल संसाधन प्रबंधन हैं।

 

 

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए नई औद्योगिक नीति

पूर्वोत्तर राज्यों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए, औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), पूर्वोत्तर औद्योगिक और निवेश संवर्धन नीति (एनईआईआईपी), 2007 का कार्यान्वयन कर रहा था। यह नीति 31 मार्च 2017 को समाप्त हुई।

 

पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए एक नई औद्योगिक नीति के लिए एक रोडमैप की जांच करने और सुझाव देने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति आयोग की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करने के बाद अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप दिया।

 

उन सिफारिशों के आधार पर, डीआईपीपी ने मार्च, 2020 तक 3,000 करोड़ रु. के अनुमानित परिव्यय के साथ पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास योजना (एनईआईडीएस) 2017 तैयार की, जिसे मार्च, 2018 में कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था। एनईआईडीएस, 2017 में विनिर्माण और सेवा, दोनों क्षेत्रों में नई औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान हैं। एनईआईडीएस की अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं।