भारतीय हिमालयी क्षेत्र 12 भारतीय राज्यों (अर्थात् जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, असम के दो जिलों अर्थात् दीमा हसाओ और कार्बी एंगलोंग तथा पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग और कालिम्पोंग) में 2500 किमी की लंबाई और 250 से 300 किमी की चौड़ाई में फैला हुआ है। अकेले भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में लगभग 50 मिलियन लोग निवास करते हैं। आईएचआर विविध जनसांख्यिकीय, आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और राजनीतिक प्रणालियों द्वारा अभिलक्षित है।
2017 में, भारत सरकार, नीति आयोग द्वारा विषयगत क्षेत्रों में से प्रत्येक पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) के पर्वतों में संधारणीय विकास के लिए समूहों के संयोजक के रूप में लीड संस्थानों के साथ पाँच कार्यदलों का गठन किया गया।
विषयगत कार्य समूह हैं:
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जल सुरक्षा के लिए हिमालय में झरनों की संख्या और पुनरुद्धार,
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भारतीय हिमालयी क्षेत्र में संधारणीय पर्यटन,
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स्थानान्तरण कृषि: परिवर्तनशील दृष्टिकोण की ओर,
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हिमालय में कौशल और उद्यमिता (ई एंड एस) परिदृश्य को सुदृढ़ करना
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सूविचारित निर्णय लेने के लिए डेटा / सूचना।
कार्य समूहों ने कई बैठकें कीं:
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3 जुलाई, 2017: विचारार्थ विषय और कार्यप्रणाली पर चर्चा करने के लिए अंतर-विषयक समूह की बैठक
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24 मई, 2018: मसौदा रिपोर्टें आईएचआर राज्यों / केंद्रीय मंत्रालयों को परिचालित की गईं
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27 जून 2018: आईएचआर राज्यों, केन्द्रीय मंत्रालयों और थेमैटिक लीड्स की बैठक
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15 जुलाई 2018: रिपोर्ट का संशोधन; सारांश रिपोर्ट का विकास
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10 अगस्त 2018: विषयगत रिपोर्ट और सारांश रिपोर्ट समीक्षा और संशोधन
23 अगस्त 2018 को नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार, सदस्य डॉ वी के सारस्वत, और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ कांत, द्वारा भारतीय हिमालयी क्षेत्र के पहाड़ों में सतत विकास पर कार्य समूह रिपोर्ट और एक सारांश रिपोर्ट जारी की गई थी।
भारतीय हिमालयी क्षेत्र में संधारणीय विकास के लिए ‘हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद’ का गठन
पांच विषयगत कार्य समूह रिपोर्टों की सिफारिशों के आधार पर, 9 नवंबर, 2018 को नीति आयोग ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र में संधारणीय विकास के लिए ‘हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद’ का गठन किया है। डॉ. वी.के. सारस्वत, सदस्य, नीति आयोग की अध्यक्षता में, परिषद, रिपोर्टों के आधार पर निर्दिष्ट कार्य बिन्दुओं के कार्यान्वयन की समीक्षा करेगी।
परिषद के शेष सदस्यों में 12 हिमालयी राज्यों के मुख्य सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग, भूमि संसाधन विभाग और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, तेलंगाना वन विकास निगम, तेलंगाना सरकार के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, , महानिदेशक, आईसीआईएमओडी, काठमांडू, नेपाल और नीति आयोग के सलाहकार शामिल होंगे।
परिषद हिमालयी क्षेत्र में संधारणीय विकास के लिए नोडल एजेंसी भी होगी और केंद्रीय मंत्रालयों, संस्थानों और आईएचआर में l2 हिमालयी राज्य सरकारों के लिए कार्रवाई बिंदुओं के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी। यह वित्त संबंधी मामलों की निगरानी भी करेगी और इसके पास आईएचआर के संधारणीय विकास के समग्र उद्देश्य के लिए सर्वथा उपयुक्त माने जाने वाले अन्य सदस्यों को सहयोजित करने की शक्ति होगी।





