श्री अमिताभ कांत वर्तमान में राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (नीति आयोग) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) (केरल संवर्ग: 1980 बैच) के सदस्य हैं। वे "ब्रांडिंग इंडिया – एन इनक्रेडिबल स्टोरी" के लेखक हैं। श्री कांत "मेक इन इंडिया", "स्टार्टअप इंडिया", "इनक्रेडिबल इंडिया" और "गॉड्स ओन कंट्री'' अभियानों के प्रमुख संचालक रहे हैं जिनके कारण भारत और केरल राज्य को अग्रणी विनिर्माण और पर्यटन स्थलों के रूप में पहचान मिली। इन अभियानों को कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं और इनके तहत विभिन्न कार्यकलापों को शामिल किया गया है, जैसे- अवसंरचना विकास, उत्पाद संवर्धन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और व्यापक बाज़ार अनुसंधान पर आधारित पोजिशनिंग तथा ब्रांडिंग। श्री कांत ने ‘‘अतिथि देवो भव:’’ - ‘‘अतिथि भगवान है’’ अभियान की संकल्पना भी तैयार की जिसका उद्देश्य टैक्सी ड्राइवरों, गाइड्स, आप्रवास अधिकारियों को प्रशिक्षित करना और उन्हें पर्यटन विकास प्रक्रिया में हितधारक बनाना है। श्री अमिताभ कांत यूएनडीपी की ग्रामीण पर्यटन परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना निदेशक भी रह चुके हैं जिसके तहत हस्तशिल्प, हथकरघा और संस्कृति में आधारभूत-सक्षमता रखने वाले भारतीय गांवों तक पर्यटन का विस्तार करने के संबंध में आमूल परिवर्तन लाया जा सका।
भारत सरकार में सचिव (उद्योग) की हैसियत से श्री कांत ने व्यवसाय करने में सुगमता संबंधी पहल तथा परिणाम मानदंडों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग का संचालन किया। वे भारत में डिजिटल भुगतान का कार्यान्वयन करने संबंधी समिति के अध्यक्ष हैं।
श्री कांत को ‘इकनॉमिक टाइम पॉलिसी चेंज एजेंट ऑफ द ईयर अवार्ड’, ‘द ब्लूमबर्ग टीवी पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर अवार्ड’, ‘द एनडीटीवी एडमिनिस्ट्रेटर ऑफ द ईयर अवार्ड’, तथा ‘डिस्टिंग्विश्ड फेलोशिप ऑफ द इंस्टीट्यूट ऑफ डाइरेक्टर्स’ से सम्मानित किया गया है। इन्हें 21वीं सदी के लिए शासन को परिवर्तित करने में नेतृत्व के लिए ‘वन ग्लोब अवार्ड-2016’ से भी सम्मानित किया गया है। वे विश्व आर्थिक मंच के ‘‘उत्पादन प्रणालियों के भविष्य को निर्धारित करने’’ संबंधी संचालन बोर्ड के सदस्य हैं। इन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधान मंत्री से ‘सर एडमंड हिलेरी फेलोशिप’ पुरस्कार भी प्राप्त किया है। इन्हें आर्थिक परिवर्तन में नेतृत्व के लिए गोल्डन पीकॉक पुरस्कार-2017 से भी सम्मानित किया गया है।
श्री अमिताभ कांत आईटीडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव, केरल सरकार के पर्यटन सचिव, केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक, कोजिकोड के जिलाधिकारी और ‘‘मत्स्यफेड’’ के प्रबंध निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। इन्होंने केरल में अपने कार्यकाल के दौरान ‘‘यूज़र्स फ्री’’ पर आधारित निजी क्षेत्र की परियोजना के रूप में कालीकट विमानपत्तन की संरचना तैयार की और सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत बीएसईएस विद्युत परियोजना और मत्तनचेरी पुल का विकास किया। इन्हें मत्स्य-पालन क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकी (फाइबरग्लास क्राफ्ट्स एंड आउटबोर्ड मोटर) की शुरुआत करने तथा समुद्र-तट स्तरीय नीलामियां शुरू करने का श्रेय भी प्राप्त है जिससे पारंपरिक मछुआरों के लाभ में पर्याप्त वृद्धि हुई है।
श्री अमिताभ कांत ने अपनी स्कूली पढ़ाई मॉडर्न स्कूल, दिल्ली से की, सेंट स्टीफंस, दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक (ऑनर्स) किया तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एम.ए. की उपाधि ली। वे एक शेवेनिंग स्कोलर (Chevening Scholar) हैं।





