डॉ. जोराम अनिया प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, शोधकर्ता, लोकसाहित्यविद् एवं लेखिका हैं। उन्हें उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा शैक्षणिक प्रशासन के क्षेत्र में लगभग दो दशकों का अनुभव प्राप्त है।
डॉ. अनिया ने राजीव गांधी विश्वविद्यालय (पूर्व में अरुणाचल विश्वविद्यालय) से हिंदी में पीएच.डी., नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग से हिंदी में एम.ए. तथा दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है।
नीति आयोग में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों पर कार्य किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षणिक विनियामक आयोग (एपीपीईआरसी) के माननीय सदस्य के रूप में भी दायित्व निर्वहन किया।
डॉ. अनिया आदिवासी ज्ञान-प्रणालियों की प्रख्यात विद्वान हैं। उन्होंने विशेष रूप से न्यीशी समुदाय तथा अरुणाचल प्रदेश के अन्य जनजातीय समाजों की भाषा, लोकसाहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन, संरक्षण और प्रलेखन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रमुख शैक्षणिक अभिरुचि क्षेत्रों में हिंदी भाषा एवं साहित्य, जनजातीय अध्ययन, इतिहास, संस्कृति, समाजशास्त्र तथा आदिवासी ज्ञान-प्रणालियाँ शामिल हैं। उन्होंने लोकसाहित्य के क्षेत्र में अनेक पुस्तकों की रचना की है तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक पत्रिकाओं में अनेक शोध-पत्र एवं लेख प्रकाशित किए हैं।
डॉ. अनिया ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, सम्मेलनों तथा साहित्यिक मंचों में सक्रिय रूप से सहभागिता की है। वे एक प्रख्यात पब्लिक स्पीकर भी हैं तथा भारतीय भाषाओं और जनजातीय संस्कृतियों के संवर्धन एवं संरक्षण की प्रबल समर्थक हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक, भाषायी एवं परामर्शदात्री निकायों में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। इनमें केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल), मैसूरु की सदस्यता; नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (एनईएचयू) की कार्यकारी परिषदों की सदस्यता तथा असम विश्वविद्यालय, सिलचर की सदस्यता; यूजीसी नामित सदस्य के रूप में मिजोरम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक सलाहकार परिषद की सदस्यता; तथा विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय आदि की हिंदी सलाहकार समितियों में सदस्य के रूप में दायित्व शामिल हैं। इन दायित्वों के माध्यम से उन्होंने उच्च शिक्षा, भाषा के संवर्धन तथा लोक नीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डॉ. अनिया को अरुणाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा तथा हिंदी के क्षेत्र में अग्रणी विद्वान के रूप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है। वे अरुणाचल प्रदेश की पहली स्कॉलर हैं, जिन्होंने हिंदी में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। यह उपलब्धि राज्य के शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
शिक्षा, साहित्य एवं सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए डॉ. अनिया को अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें मॉरीशस में वर्ष 2018 में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में प्रदान किया गया विश्व हिंदी सम्मान विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो हिंदी के वैश्विक संवर्धन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, उन्हें अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल द्वारा अकादमी सम्मान तथा अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं शैक्षणिक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है।
नीति आयोग के सदस्य के रूप में, डॉ. जोराम अनिया राष्ट्रीय नीति-निर्माण में योगदान दे रही हैं। उनकी विशेष रुचि शिक्षा, भाषा, आदिवासी ज्ञान-प्रणालियों, पर्यटन एवं संस्कृति, मानव संसाधन विकास तथा समावेशी विकास के क्षेत्रों में है।
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